सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड :दिव्य चैनल

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सुन्दरकाण्ड श्री हनुमान जी महाराज के दिव्य पराक्रम और अपनी प्रभु के प्रति भक्ति की कथा का अनुपम काण्ड है।
माता सीता की खोज के लिए जब अंगद के  नेतृत्व वाला वानरदल समुद्र के किनारे हताश हो कर बैठ जाता है।  तब जामवंत जी श्री हनुमान जी को उनके उड़ने की शक्तियों का स्मरण करवाते है।  जब हनुमान जी को अपनी शकितयों का पुनः स्मरण होता है , तब वे समुद्र लाँघ कर लंका पहुंच जाते है।  लंका पहुँच कर  उनकी  भेंट रावण के छोटे भाई विभीषण से होती है।  जो उनको अशोक वाटिका मैं बैठी सीता माता का पता बताते है।  इसके बाद हनुमान जी अशोक वाटिका पहुँच जाते हैं।  और माता सीता के दर्शन करते है।
इसी समय रावण भी अशोक वाटिका में आता है।  उसके बाद हनुमान जी रावण के पुत्र अक्षकुमार का वध करते है।  बाद में क्रोधित हो कर मेघनाद हनुमान जी को ब्रह्मपाश में बंदी बनाकर उन्हें रावण के दरबार में ले जाता है।  रावण के दरबार में पहुंच कर हनुमान जी  रावण को विभिन्न नीति धर्मों से रावण को समझाने का प्रयास करते है। लेकिन रावण हनुमान जी की पूछ में आग लगाने का आदेश दे देता है इसके बाद हनुमान जी अपनी पूछ से पूरी लंका जला देते हैं।  और वापस आ कर माता सीता से जुड़ामणि ले कर वापस वानरदल में आ जाते हैं।  इसी कहानी का विस्तृत वर्णन श्री गोस्वामी तुलसी दास ने श्री रामचरित मानस में किया है।  जिसे सूंदर काण्ड कहते हैं।


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